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विधानसभा अयोध्या के दावेदारों की कहानी आपकी जुबानी

विनय कटियार ने अयोध्या विधानसभा से दावेदारी कर सियासी गलियारे में मचाई हलचल

रिपोर्टर -शिवदयाल

अयोध्या –
2027 में विधानसभा अयोध्या के चुनाव में विनय कटियार के चुनाव लड़ने की इच्छा के बाद जिले के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है।
वही सोशल मीडिया पर चल रही वीडियो में भाजपा रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े 3 बार लोक सभा( 1991,1993,1999 )और 2 बार राज्य सभा(2006 से 2012 और 2012 से 2018)का प्रतिनिधित्व करने वाले विनय कटियार भी विधानसभा क्षेत्र अयोध्या से लड़ने की बात कर रहे।भाजपा खाटी की उपज विनय कटियार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता अभी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विनय कटियार से उनके हिंदू धाम लखनऊ आवास पर मुलाकात भी की थी। उनके टिकट मांगने पर पार्टी पर दबाव भी रहेगा।
जहां अयोध्या लोक सभा के पूर्व सांसद लल्लू सिंह विद्यार्थी परिषद की उपज है और उन्हें शुरू से ही संघ का वरदहस्त प्राप्त रहा। लल्लू सिंह शुरू से विचारधारा की राजनीति करने वाले दो बार भाजपा के जिलाध्यक्ष रहने के बाद लगातार 1991,1993,1996,2002,2007 पांच बार के विधायक और 2014,2019 कुल दो बार के फैजाबाद अयोध्या के सांसद रहे। संगठन में 35 साल की सफल राजनीति करने वाले लल्लू सिंह जिले में अन्य दलों से आयातित विधायकों की गुटबाजी से जूझते नजर आ रहे ,वही पार्टी से जुड़े लोगों की माने तो 2024 के लोकसभा के चुनाव में विरोध का कारण गुटबाजी भी रहा। लल्लू सिंह को संगठन के लोग पार्टी में बरगद की संज्ञा से नवाजते नजर आते है।लल्लू सिंह के पुत्र विकास सिंह विधानसभा के कार्यक्रमों में लगातार दिखाई पड़ रहे वही दबी जुबान चर्चा का विषय है कि लल्लू सिंह स्वयं 2027 का चुनाव लड़ने का मन बना रहे।
वर्तमान भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता 2002 में साइकिल पर सवार होकर समाजवादी पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़े और 31936 मत के साथ तीसरे स्थान पर रहे इसके बाद वेद सपाई से बसपाई हुए और दल बदलकर 2012 में बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़कर 33481 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। साइकिल और हाथी पर सवार होकर सफलता नहीं मिली तो भाजपा का दामन थामा और 2017 में लल्लू सिंह के सांसद होने से रिक्त हुई सीट पर हाथ आजमाने का मौका मिला और इस बार मोदी और योगी लहर में विधानसभा पहुंच गए। 2022 में पुनः भाजपा से चुनाव जीतकर दुबारा विधायक बने लेकिन 2027 में उम्र 80 होने पर अपने परिवार में राजनैतिक विरासत को संजोए रखने की फिराक में है और अपने पुत्र अमल गुप्ता को विधानसभा क्षेत्र में लगातार बनाए हुए हैं। वही अंदरखाने की माने तो वेद प्रकाश गुप्ता के बड़े पुत्र विशाल गुप्ता भी 1 साल से राजनीति में सक्रिय हो गए है और वह भी अयोध्या से विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते है वेद प्रकाश गुप्ता के दोनों पुत्रों के चुनाव लड़ने की इच्छा जताने के बाद लोगों की माने तो दोनों में आपस की सहमति नहीं बनने पर वेद तीसरी बार पार्टी से दावेदारी करेंगे। वेद प्रकाश गुप्ता विचारधारा बदलने सपा,बसपा और भाजपा सभी में मौका देखकर चौका मारने में माहिर खिलाड़ी है जहां भाजपा विचारधारा की राजनीति करती है वही वेद प्रकाश गुप्ता इससे इतर परिवारवाद और समय रहते मौके से दल बदल करने में माहिर है।वही विद्यार्थी परिषद की उपज और संघ के चहेते शुरू से विचारधारा की राजनीति करने वाले ऋषिकेश उपाध्याय विधानसभा अयोध्या से प्रबल दावेदार है रामजन्म भूमि आंदोलन से भी जुड़े रहे और 2017 में नगर निगम अयोध्या का भाजपा से चुनाव लड़े और नगर निगम अयोध्या के प्रथम महापौर बने।शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े और उत्कृष्ठ समाजसेवी के रूप में उनकी चर्चा रहती है।अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में भाजपा के साथ रहे हैं। ऋषिकेश उपाध्याय को 2023 के नगर निगम अयोध्या के चुनाव में टिकट नहीं मिला था।संगठन द्वारा उन्हें समायोजित करने का दबाव रहेगा। वही गिरीश पति त्रिपाठी भी कांग्रेस की उपज है जिनके पिता बबुआ जी 1987 में भाजपा के अवधेश दास शास्त्री के ख़िलाफ़ अयोध्या नगर पालिका का चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़े थे और कुछ ही मतों से पराजित हुए थे। गिरीश पति त्रिपाठी का 2015 में कांग्रेस से मोहभंग हुआ और कमल पर सवार हो लिए, तीन कलश मंदिर के महंत होने और अमेठी में गुरु शिष्य परंपरा से जुड़ने के कारण भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी से राजनैतिक सफर में मिलना हुआ और साल 2023 में अयोध्या नगर निगम से टिकट मिला और महापौर बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पार्टी के लोगों का मानना है कि महापौर का टिकट दिलाने में स्मृति ईरानी की अहम भूमिका थी। उनके अंदर भी महापौर के बाद की अगली सीढ़ी विधानसभा का नेतृत्व करने की अलख जगी है और अंदरखाने में चर्चा है कि इस बार गिरीश पति त्रिपाठी भी विधानसभा क्षेत्र अयोध्या से चुनाव लड़ने का दम भरेंगे।
वही गोसाईगंज विधानसभा से विधायक अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने पर वहां से भाजपा का चुनाव लड़े इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू को भाजपा द्वारा कही न कही समायोजित करने का दबाव रहेगा, और खब्बू अयोध्या से दावेदारी भी कर सकते हैं भाजपा से जुड़े वरिष्ठ लोगों का यह भी मानना है कि वेद प्रकाश गुप्ता की उम्र के तगाजे को देखते हुए खब्बू को पार्टी अयोध्या विधानसभा में समायोजित कर सकती है। तो वहीं जन चर्चा और पार्टी के सूत्रों की माने तो अयोध्या विधानसभा से दावेदारी में भाजपा नेता शक्ति सिंह, अभिषेक मिश्रा भी प्रमुख है।

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अवैध खनन के साम्राज्य पर प्रशासन का वज्रपात: प्रतिष्ठित कंपनी पर 1.52 करोड़ का जुर्माना, कई पट्टेदारों की गाड़ियाँ जब्तअयोध्या ।जनपद में अवैध खनन के जरिए सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले सिंडिकेट के विरुद्ध प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बड़े ऑपरेशन में एसडीएम सदर रामप्रसाद त्रिपाठी और खनन अधिकारी आशीष द्विवेदी की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभालते हुए खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया। जांच टीम जब धरातल पर उतरी तो नियमों की भारी अनदेखी और राजस्व की चोरी का बड़ा खेल सामने आया। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित कंपनी पर 1 करोड़ 52 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है। सिर्फ यही नहीं कई अन्य पट्टेदारों को भी नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए भारी आर्थिक दंड की जद में लाया गया है। जो वाहन अवैध रूप से धरती का सीना चीरते हुए पाए गए उन्हें प्रशासन ने तत्काल ज़ब्त कर पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया है।प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार और राजस्व की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीएम सदर रामप्रसाद त्रिपाठी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति या समूह राजस्व को किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाने की कोशिश करेगा तो हमारी टीम की जांच में दोषी पाए जाने पर इससे भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। खनन अधिकारी आशीष द्विवेदी ने बताया कि पकड़े गए पट्टेदारों और कंपनी की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और अभी कई अन्य शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई होना बाकी है। जल्द ही इन सभी मामलों की विस्तृत साक्ष्य रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि दोषियों पर शिकंजा और कसा जा सके।प्रशासन की इस देर हुई लेकिन दुरुस्त हुई” कार्रवाई के पीछे अंतरिक्ष तिवारी के रजिस्टर्ड समाचार पत्र एवं आप की ताकत के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ताकत छिपी है। अपनी कलम और डिजिटल माध्यमों से लगातार उठाए गए इन मुद्दों पर अंततः शासन और प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया। एक सजग पत्रकार के तौर पर बिना किसी दबाव के तथ्यों को उजागर करने का ही परिणाम है कि आज अवैध साम्राज्य को घुटने टेकने पड़े। Kk
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