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बेगूसराय: रेलवे में नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, 46 महीने बाद 13 जालसाजों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी |

बैंक चेक बाउंस होने से खुला राज ​ठगी का यह खेल काफी समय से चल रहा था। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने पीड़ित को बैंक चेक थमा दिए। लेकिन जब पीड़ित ने चेक बैंक में लगाए, तो वे बाउंस (Dishonor) हो गए। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित को समझ आया कि वह एक बड़े रैकेट का शिकार हो चुका है, जिसके बाद मामला पुलिस की चौखट तक पहुँचा।

नि. ज संवाददाता |

बेगुसराय ( बिहार )

06-01-26( मंगलवार )

रिपोर्ट :- अभिजीत कुमार झा

बेगूसराय ( बिहार ) :- बिहार के बेगूसराय जिले से ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये से अधिक की लूट की गई। इस मामले में पुलिस ने करीब 4 साल (46 महीने) के लंबे इंतजार के बाद अब कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय द्वारा इस धोखाधड़ी में शामिल 13 नामजद आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) जारी कर दिया गया है।

ऊँचे रसूख वालों ने मिलकर बुना जाल​इस ठगी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें समाज के प्रतिष्ठित पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों की लिस्ट में निम्नलिखित लोग शामिल बताए जा रहे हैं:​शिक्षिका​कॉलेज क्लर्क​जन वितरण प्रणाली (डीलर)​लिपिक (क्लर्क)​इन रसूखदार लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़ित को रेलवे में पक्की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और किस्तों में 15 लाख रुपये से अधिक की रकम ऐंठ ली गईं।

46 महीने का लंबा इंतजार और कानूनी कार्रवाई​मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी लंबे समय तक बचते रहे। आखिरकार, जांच और साक्ष्यों के आधार पर 46 महीने बाद कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ है। 13 नामजद अभियुक्तों के खिलाफ वारंट जारी होने से अब उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।

बेगूसराय में नौकरी के नाम पर ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन इसमें सफेदपोश लोगों की संलिप्तता ने प्रशासन और जनता के बीच हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल पुलिस छापेमारी की तैयारी में है।

बैंक चेक बाउंस होने से खुला राज​ठगी का यह खेल काफी समय से चल रहा था। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने पीड़ित को बैंक चेक थमा दिए। लेकिन जब पीड़ित ने चेक बैंक में लगाए, तो वे बाउंस (Dishonor) हो गए। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित को समझ आया कि वह एक बड़े रैकेट का शिकार हो चुका है, जिसके बाद मामला पुलिस की चौखट तक पहुँचा।

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