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दिल्ली न्युज डेस्क 07-01-026( बुधवार )
रिपोर्ट: अभिजीत झा (स्टेट हेड)
सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों और भर्ती बोर्डों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘जनरल’ या ‘ओपन’ कैटेगरी किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से योग्यता (Merit) पर आधारित है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आइये जानते है जरा ?
जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यदि SC, ST, OBC या EWS वर्ग का कोई उम्मीदवार अपनी मेहनत के दम पर बिना किसी आरक्षण का लाभ लिए (जैसे उम्र में छूट या कट-ऑफ में रियायत) जनरल कैटेगरी के बराबर या उससे अधिक अंक लाता है, तो उसका चयन ओपन कैटेगरी की सीट पर ही होगा।
फैसले के 5 सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ
मेरिट ही एकमात्र पैमाना -ओपन कैटेगरी में चयन के लिए उम्मीदवार की जाति, धर्म, वर्ग या लिंग का कोई महत्व नहीं है। यहाँ सिर्फ और सिर्फ प्राप्त अंक (Marks) मायने रखते हैं।जाति का उल्लेख मात्र दावा नहीं -फॉर्म भरते समय जाति का उल्लेख करना केवल यह दर्शाता है कि उम्मीदवार उस वर्ग की सुविधा पाने का हकदार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकता।छूट लेने पर नियम में बदलाव – यदि किसी उम्मीदवार ने भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण (Pre, Mains या Interview) में आरक्षण का लाभ (जैसे- फीस माफी या आयु सीमा में छूट) लिया है, तो उसे ‘मेरिटोरियस’ मानकर जनरल कैटेगरी में नहीं गिना जाएगा।जनरल उम्मीदवारों के हितों की सुरक्षा – कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्र का जनरल सीट पर जाना जनरल उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन नहीं है, बल्कि यह शुद्ध मेरिट सिस्टम का पालन है।भर्ती बोर्डों के लिए स्पष्टता – अब भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों में रिजल्ट तैयार करते समय ‘मेरिट’ और ‘कोटा’ के बीच का भ्रम दूर हो जाएगा।
राजस्थान की भर्ती से शुरू हुआ विवादयह मामला राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा आयोजित 2,756 पदों की भर्ती से शुरू हुआ था। कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ से भी ज्यादा अंक हासिल किए थे। लेकिन तकनीकी कारणों से और अपनी स्वयं की कैटेगरी का कट-ऑफ पार न करने की वजह से उन्हें चयन सूची से बाहर कर दिया गया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि जनरल लिस्ट पूरी तरह से मेरिट लिस्ट है। अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी इसी तर्क को सही ठहराया है।
यह फैसला आने वाले समय में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (BPSC, UPPSC आदि) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाएगा। इससे उन मेधावी छात्रों को लाभ मिलेगा जो आर्थिक या सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों से आते हैं लेकिन अपनी प्रतिभा के दम पर शिखर पर पहुँचने का माद्दा रखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आदेश के टिप्पणी का सारांश यह रहा की :-”संविधान का मूल उद्देश्य मेरिट को प्राथमिकता देना है। ओपन कैटेगरी सभी के लिए खुली है, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो।”


