बेगुसराय ( बिहार )
रिपोर्ट :- अभिजीत झा स्टेट हेड
बिहार – झारखण्ड – बंगाल प्रदेश
05- 01-026 ( सोमवार )
बेगूसराय ( बिहार ) :- जिले के हजारों वाहन मालिकों और चालकों के लिए एक बुरी खबर है। बेगूसराय में वाहनों की फिटनेस जांच की सुविधा अचानक बंद हो गई है, जिसके कारण अब उन्हें अपने वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट (CF) बनवाने के लिए जिला छोड़कर 120 किलोमीटर दूर जाना होगा। इस बदलाव से न केवल वाहन मालिकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, बल्कि समय की भी भारी बर्बादी होगी।
अब तक बेगूसराय जिले के वाहनों की फिटनेस जांच स्थानीय स्तर पर जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के माध्यम से या निर्धारित केंद्रों पर हो जाती थी। लेकिन हालिया आदेशों और तकनीकी बदलावों के कारण बेगूसराय में यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। जिले के ट्रक, बस, ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहनों को अब फिटनेस के लिए मुजफ्फरपुर या पटना जैसे दूरस्थ केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ेगा |
वाहन चालकों के सामने खड़ी हुईं ये प्रमुख चुनौतियां:आर्थिक बोझ: 120 किलोमीटर दूर जाने-आने में डीजल और समय का बड़ा खर्च होगा। साथ ही, व्यावसायिक वाहनों का एक पूरा दिन का काम भी प्रभावित होगा।जुर्माने का डर: फिटनेस समय पर न होने की स्थिति में परिवहन विभाग द्वारा भारी जुर्माने का प्रावधान है। बेगूसराय में सुविधा बंद होने से कई वाहनों की फिटनेस एक्सपायर होने की कगार पर है।सड़कों पर जाम और खतरा: अनफिट वाहनों को लंबी दूरी तय कर जांच केंद्र तक ले जाना अपने आप में जोखिम भरा और यातायात नियमों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है।
नए आदेश के बाद जिले के सैकड़ों वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाण पत्र (Fitness certificate) के लिए पटना स्थित वैष्णवी ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (Vaishnavi Automated Fitness Center) जाना अनिवार्य हो गया है। फिटनेस शुल्क के अलावा पेट्रोल-डीजल खर्च, टोल-टैक्स, समय की बर्बादी और अन्य खर्चों का बोझ भी वाहन चालकों को उठाना पड़ेगा।
ऐसे में जिन वाहनों के पास बेगूसराय-पटना रूट का परमिट नहीं है, उन्हें फिटनेस जांच के लिए पटना ले जाने पर रास्ते में चालान और जुर्माने का खतरा बना रहेगा |
सूत्रों के मुताबिक, फिटनेस जांच की प्रक्रिया को अब पूरी तरह ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के जरिए करने की तैयारी है। बेगूसराय में फिलहाल अत्याधुनिक जांच केंद्रों की कमी या तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण स्थानीय स्तर पर स्लॉट मिलना बंद हो गया है। सरकार की नीति है कि फिटनेस जांच में मानवीय दखल कम हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी से फिलहाल जनता को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
वाहन मालिक संघ का कहना है कि प्रशासन को कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। बिना तैयारी के स्थानीय स्तर पर जांच बंद करना तानाशाही जैसा है। अगर जल्द ही बेगूसराय में फिटनेस जांच शुरू नहीं हुई, तो वाहन चालक आंदोलन की राह भी पकड़ सकते हैं।
वाहन मालिक का कहना है की हमें समझ नहीं आ रहा कि 120 किलोमीटर दूर जाकर फिटनेस कराना कैसे संभव होगा। छोटे टेंपो और ऑटो वालों के लिए तो यह आर्थिक रूप से कमर तोड़ने वाला फैसला है।


